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स्कूल में इंग्लिश: NEP 2020 और CBSE के नए नियम, कक्षा 1 से 5 तक

प्राइमरी स्कूल की कक्षा में यूनिफ़ॉर्म पहने बच्चे घेरा बनाकर बैठे हैं और टीचर चित्रों वाली बड़ी किताब दिखाकर बातचीत करवा रही हैं

NCERT की इंग्लिश किताबें कक्षा 1 से हैं: CBSE स्कूलों में नई किताबें मृदंग (कक्षा 1–2) और संतूर (कक्षा 3–5) चलती हैं। बदला यह है कि CBSE के 22 मई 2025 के सर्कुलर के अनुसार CBSE स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक पढ़ाई का माध्यम बच्चे की घर की या जानी-पहचानी भाषा (R1) होना चाहिए। यह इंग्लिश पर रोक नहीं है: NCERT की किताबें इंग्लिश को दूसरी भाषा मानकर पढ़ाती हैं, और शुरुआत बोलने और सुनने से होती है।

इस लेख में नियमों और किताबों की हर जानकारी आधिकारिक दस्तावेज़ों से ली गई है: NEP 2020 का मूल पाठ, CBSE का सर्कुलर Acad-30/2025 और NCERT की इंग्लिश किताबों की भूमिकाएँ। सभी स्रोत 5 अक्टूबर 2026 को देखे गए।

NEP 2020 भाषा के बारे में क्या कहती है?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 बहुभाषिकता पर ज़ोर देती है। उसके पैरा 4.11 के अनुसार जहाँ तक संभव हो, कम से कम कक्षा 5 तक, और बेहतर हो तो कक्षा 8 और उसके आगे भी, पढ़ाई का माध्यम घर की भाषा, मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा होगा, सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूलों में। यही पैरा यह भी कहता है कि किसी भाषा को अच्छी तरह सीखने के लिए उसका पढ़ाई का माध्यम होना ज़रूरी नहीं है।

पैरा 4.12 कहता है कि बच्चे 2 से 8 साल की उम्र में भाषाएँ बहुत तेज़ी से सीखते हैं, इसलिए फ़ाउंडेशनल स्टेज से ही उन्हें अलग-अलग भाषाओं से परिचय मिलेगा, मातृभाषा पर ख़ास ज़ोर के साथ; दूसरी भाषाओं में पढ़ने-लिखने का कौशल कक्षा 3 और उसके आगे विकसित होगा। पैरा 4.13 के अनुसार तीन-भाषा फ़ॉर्मूला जारी रहेगा, किसी राज्य पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी, और तीन में से कम से कम दो भाषाएँ भारत की होंगी (NEP 2020, PIB की आधिकारिक प्रति; UGC का सार)।

NEP 2020 ने स्कूली ढाँचे को 5+3+3+4 में बाँटा है। हमारे पाठकों के बच्चों (4–9 साल) के लिए पहले दो हिस्से ज़रूरी हैं:

स्टेज कक्षाएँ उम्र (लगभग) इंग्लिश के लिए मतलब
फ़ाउंडेशनल बालवाटिका (नर्सरी, LKG, UKG) + कक्षा 1–2 3–8 साल खेल, बातचीत, राइम्स; दो बोली जाने वाली भाषाओं से परिचय
प्रिपरेटरी कक्षा 3–5 8–11 साल R1 और R2 दोनों में बोलना, पढ़ना और लिखना आगे बढ़ता है

CBSE का मई 2025 का सर्कुलर: R1 और R2 क्या हैं?

CBSE ने 22 मई 2025 को सर्कुलर Acad-30/2025 जारी किया: "Implementation Guidelines for Language Instruction under National Curriculum Framework for School Education-2023 for Foundational and Preparatory Stages"। इसके अनुसार सभी CBSE स्कूलों को 2025-26 सत्र से NCF-SE 2023 के भाषा प्रावधान अपनाने हैं (CBSE सर्कुलर, PDF)।

  • R1 वह पहली भाषा है जिसमें बच्चा साक्षर होता है। सर्कुलर के अनुसार यह आदर्श रूप से बच्चे की मातृभाषा या कोई जानी-पहचानी क्षेत्रीय/राज्य भाषा हो।
  • R2 दूसरी भाषा है। हिंदी बोलने वाले परिवारों में आम तौर पर R1 हिंदी और R2 इंग्लिश होती है, पर अंतिम फ़ैसला स्कूल का है।
  • फ़ाउंडेशनल स्टेज (प्री-प्राइमरी से कक्षा 2): पढ़ाई का माध्यम R1 होना चाहिए। ज़ोर दो बोली जाने वाली भाषाओं (R1 और R2) से परिचय पर है, और सीखने के परिणाम "मुख्य रूप से मौखिक और अनुभव पर आधारित" बताए गए हैं।
  • प्रिपरेटरी स्टेज (कक्षा 3–5): बच्चे R1 में पढ़ाई जारी रख सकते हैं। R2 (जैसे इंग्लिश) माध्यम में पढ़ने का विकल्प दिया जा सकता है, यह देखकर कि बच्चा R2 में बुनियादी पढ़ना-लिखना सीख चुका है या नहीं।
  • समय-सीमा: सर्कुलर के मुताबिक़ लागू करना जुलाई 2025 से शुरू हो सकता था; जिन स्कूलों को सामग्री जुटाने, शिक्षकों की तैनाती या पाठ्यक्रम बदलने के लिए समय चाहिए, वे कुछ और समय ले सकते थे, पर बहुत देर नहीं।

प्रिपरेटरी स्टेज में R2 के लिए सर्कुलर जो क्षमताएँ गिनाता है, वे घर के अभ्यास के लिए भी अच्छा नक्शा हैं: कहानियाँ और बातचीत ध्यान से सुनना, बातचीत और समूह-चर्चा में हिस्सा लेना, ध्वनियों को जोड़ना-तोड़ना (blending, segmenting), धाराप्रवाह पढ़ना, और छोटे पैराग्राफ़, पोस्टर या निमंत्रण लिखना।

क्या इंग्लिश मीडियम स्कूल अब हिंदी में पढ़ाएंगे?

यह सवाल बहुत से माता-पिता पूछते हैं। सीधा जवाब:

  1. सर्कुलर CBSE स्कूलों के लिए है और कहता है कि प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक माध्यम R1 हो। यह इंग्लिश मीडियम स्कूल बंद करने का आदेश नहीं है। आपके स्कूल ने इसे किस तरह और कब लागू किया, यह हर स्कूल में अलग हो सकता है।
  2. इंग्लिश एक विषय के रूप में बनी रहती है। NCERT ने कक्षा 1 से इंग्लिश की किताबें बनाई हैं, और फ़ाउंडेशनल स्टेज में दो भाषाओं से परिचय सर्कुलर का हिस्सा है।
  3. कक्षा 3 से विकल्प खुलता है। जिन बच्चों ने R2 में बुनियादी पढ़ना-लिखना सीख लिया है, उन्हें R2 माध्यम का विकल्प दिया जा सकता है। साथ ही, जिन स्कूलों का मुख्य माध्यम कोई भारतीय भाषा नहीं है (जैसे इंग्लिश), उन्हें प्रिपरेटरी स्टेज से हर कक्षा में किसी भारतीय भाषा को माध्यम चुनने का विकल्प देना है।

इसलिए घबराने के बजाय स्कूल से तीन बातें लिखित में पूछ लीजिए: आपके बच्चे के लिए R1 और R2 कौन-सी भाषाएँ हैं, कौन-से विषय किस भाषा में पढ़ाए जा रहे हैं, और इंग्लिश के हफ़्ते में कितने पीरियड हैं।

NCERT की नई इंग्लिश किताबें: मृदंग और संतूर

NCERT की किताबें CBSE स्कूलों में चलती हैं; CBSE का सर्कुलर भी स्कूलों से NCERT की किताबें देखने को कहता है। नई किताबों की भूमिका साफ़ कहती है कि शुरुआती कक्षाओं में इंग्लिश दूसरी भाषा (L2) है और तरीका बातचीत पर आधारित है।

कक्षा किताब पहला संस्करण इकाइयाँ (Units)
1 मृदंग (Mridang) मई 2023 My Family and Me; Life Around Us; Food; Seasons
2 मृदंग (Mridang) मई 2023 Fun with Friends; Welcome to My World; Going Places; Life Around Us; Harmony
3 संतूर (Santoor) अप्रैल 2024 Fun with Friends; Toys and Games; Good Food; The Sky
4 संतूर (Santoor) मार्च 2025 My Land; My Beautiful World; Fun with Games; Up High
5 संतूर (Santoor) जून 2025 Let's Have Fun; My Colourful World; Water; Ups and Downs; Work is Worship

स्रोत: NCERT की किताबों के शुरुआती पन्ने, 2026-27 का पुनर्मुद्रण (मृदंग 1, मृदंग 2, संतूर 3, संतूर 4, संतूर 5)।

मृदंग 1 की भूमिका में तीन बातें माता-पिता के लिए ख़ास हैं:

  • लक्ष्य बोलना है। फ़ाउंडेशनल स्टेज के अंत तक बच्चे के पास पर्याप्त शब्द हों और वह बोलकर अपनी बात कह सके। हर इकाई में "Let us speak" हिस्सा इसी के लिए है।
  • लिखना धीरे-धीरे आता है। पहले चित्र बनाना और नाम लिखना, फिर सरल शब्द, फिर छोटे वाक्यांश और सरल वाक्य। कक्षा 1 में लंबी स्पेलिंग रटाना किताब के तरीके से मेल नहीं खाता।
  • किताब अकेला साधन नहीं। QR कोड वाली सामग्री और DIKSHA प्लेटफ़ॉर्म के ऑडियो-वीडियो का ज़िक्र है, और भूमिका मानती है कि बच्चे घर, बड़ों से बातचीत, खेल और कहानियों से भी बहुत कुछ सीखते हैं।

हर कक्षा के पाठों के हिसाब से शब्द और घर के अभ्यास अलग पेजों पर हैं: कक्षा 1 इंग्लिश, कक्षा 2 इंग्लिश, कक्षा 3 इंग्लिश, कक्षा 4 इंग्लिश, कक्षा 5 इंग्लिश और नर्सरी, LKG, UKG।

कक्षा के हिसाब से बच्चा इंग्लिश में क्या सीखता है?

नीचे की तालिका CBSE सर्कुलर और NCERT की भूमिकाओं के आधार पर है। यह किसी परीक्षा का पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि यह समझने का तरीका है कि हर चरण में किस चीज़ पर ज़ोर है।

कक्षाएँ ज़ोर किस पर घर पर आप क्या करें
बालवाटिका (नर्सरी–UKG) खेल, गाने, कहानियाँ, सुनकर समझना; CBSE के अनुसार "जादुई पिटारा" जैसी खेल-आधारित सामग्री राइम्स साथ गाइए, चीज़ों के नाम इंग्लिश में बोलिए
कक्षा 1–2 बोलना और सुनना; अक्षर (छोटे-बड़े), ध्वनियों की पहचान; चित्र से शब्द, शब्द से छोटे वाक्य रोज़ छोटी बातचीत, चित्र देखकर "What is this?"
कक्षा 3–5 बातचीत, ध्वनियाँ जोड़कर पढ़ना, धाराप्रवाह पढ़ना, छोटे पैराग्राफ़ लिखना रोज़ 10 मिनट साथ पढ़ना, दिन के बारे में इंग्लिश में 3–4 वाक्य

स्टेट बोर्ड और प्राइवेट स्कूलों में क्या?

ऊपर का सर्कुलर CBSE से जुड़े स्कूलों के लिए है। स्टेट बोर्ड के स्कूलों में नियम और किताबें राज्य की अपनी हो सकती हैं, और कुछ प्राइवेट स्कूल NCERT के साथ दूसरे प्रकाशकों की किताबें भी चलाते हैं। इसलिए:

  • सत्र की शुरुआत में मिलने वाली किताबों की सूची (book list) सँभालकर रखिए; उसी से पता चलता है कि आपका बच्चा कौन-सी इंग्लिश किताब पढ़ रहा है।
  • स्कूल की भाषा-नीति पूछिए: कौन-से विषय किस भाषा में, और इंग्लिश के कितने पीरियड।
  • इंटरनेट पर "class 1 english" के कई पेज किसी एक किताब के हिसाब से लिखे होते हैं। अपनी किताब से मिलाकर ही इस्तेमाल कीजिए।

घर पर स्कूल की इंग्लिश में कैसे साथ दें?

नई किताबें बोलने से शुरू करती हैं, तो घर का अभ्यास भी वहीं से होना चाहिए। तीन आसान आदतें:

  1. रोज़ 15 मिनट इंग्लिश बातचीत, तय समय पर, छोटे वाक्यों में। पूरा तरीका और तैयार वाक्य यहाँ हैं: बच्चों को इंग्लिश बोलना कैसे सिखाएं।
  2. पाठ के शब्द आवाज़ के साथ। जिस पाठ में फल, जानवर या मौसम आएँ, उसके शब्द सुनकर दोहराइए: फलों के नाम, जानवरों के नाम, मौसम के नाम।
  3. प्रिंट करके दोहराना। शब्द-चार्ट (इंग्लिश, हिंदी अर्थ, उच्चारण) दीवार पर लगाइए और रोज़ एक पंक्ति साथ में पढ़िए: मुफ़्त वर्कशीट और चार्ट।

इन बातों से बचिए: कक्षा 1–2 में लंबे उत्तर रटाना, हर उच्चारण पर टोकना, और ट्यूशन में हिंदी अनुवाद करवाकर इंग्लिश "याद" करवाना। किताब का तरीका बोलने और समझने का है, अनुवाद रटने का नहीं।

पेरेंट-टीचर मीटिंग में क्या पूछें?

"बच्चा कैसा कर रहा है?" का जवाब अक्सर "ठीक है" होता है। इसकी जगह ये सवाल पूछिए:

  • "मेरे बच्चे के लिए R1 और R2 कौन-सी भाषाएँ हैं, और गणित-EVS जैसे विषय किस भाषा में पढ़ाए जा रहे हैं?"
  • "इंग्लिश की क्लास में बच्चे को खुद बोलने का मौका कब और कितना मिलता है?"
  • "इस महीने कौन-सी इकाई (unit) चल रही है, ताकि हम घर पर उसी के शब्द दोहराएँ?"
  • "घर पर हमें क्या नहीं करना चाहिए?"

सार

  • NCERT की इंग्लिश किताबें कक्षा 1 से हैं; CBSE स्कूलों में मृदंग (1–2) और संतूर (3–5) चलती हैं।
  • CBSE के मई 2025 के सर्कुलर के अनुसार CBSE स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक माध्यम R1 (घर की या जानी-पहचानी भाषा) होना चाहिए; यह इंग्लिश पर रोक नहीं है, और इंग्लिश अक्सर R2 है।
  • शुरुआती कक्षाओं में ज़ोर बोलने और सुनने पर है, इसलिए घर की रोज़ की बातचीत सबसे सीधा साथ है।
  • स्टेट बोर्ड और प्राइवेट स्कूल अलग हो सकते हैं; अपने स्कूल की किताबों की सूची और भाषा-नीति देखिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या अब कक्षा 1 में इंग्लिश नहीं पढ़ाई जाएगी?

पढ़ाई जाएगी। NCERT ने कक्षा 1 और 2 के लिए इंग्लिश की नई किताब मृदंग (Mridang) बनाई है, और CBSE का 2025 का सर्कुलर बुनियादी कक्षाओं में दो भाषाओं (R1 और R2) से परिचय पर ज़ोर देता है। बदलाव पढ़ाई के माध्यम में है: CBSE स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक बाकी विषय बच्चे की घर की या जानी-पहचानी भाषा (R1) में पढ़ाए जाने चाहिए।

R1 और R2 का मतलब क्या है?

R1 वह पहली भाषा है जिसमें बच्चा पढ़ना-लिखना सीखता है, आदर्श रूप से उसकी मातृभाषा या घर की जानी-पहचानी भाषा। R2 दूसरी भाषा है। हिंदी बोलने वाले परिवारों में आम तौर पर R1 हिंदी और R2 इंग्लिश होती है, पर यह स्कूल तय करता है। अपने स्कूल से पूछ लीजिए कि आपके बच्चे के लिए R1 और R2 क्या हैं।

मृदंग और संतूर किस कक्षा की किताबें हैं?

मृदंग (Mridang) NCERT की कक्षा 1 और कक्षा 2 की इंग्लिश किताब है, और संतूर (Santoor) कक्षा 3, 4 और 5 की। कक्षा 1 की मृदंग का पहला संस्करण मई 2023 में आया था और संतूर कक्षा 5 का जून 2025 में। किताबें NCERT की वेबसाइट पर PDF में भी मिलती हैं।

क्या इंग्लिश मीडियम स्कूल अब हिंदी में पढ़ाएंगे?

सर्कुलर इंग्लिश मीडियम स्कूल बंद करने या इंग्लिश पढ़ाने पर रोक का आदेश नहीं है। वह कहता है कि CBSE स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक माध्यम R1 (बच्चे की घर की या जानी-पहचानी भाषा) होना चाहिए; हिंदी बोलने वाले बच्चे के लिए यह अक्सर हिंदी होगी। स्कूल जुलाई 2025 से इसे लागू करना शुरू कर सकते थे, और जिन्हें तैयारी चाहिए, उन्हें कुछ और समय की छूट दी गई। कक्षा 3 से R2 (जैसे इंग्लिश) माध्यम का विकल्प दिया जा सकता है। आपके स्कूल ने असल में क्या लागू किया है, यह स्कूल से ही पूछिए।

क्या यह नियम स्टेट बोर्ड के स्कूलों पर भी लागू है?

यह सर्कुलर CBSE से जुड़े स्कूलों के लिए है। स्टेट बोर्ड के स्कूलों में राज्य के अपने नियम और किताबें हो सकती हैं, और कुछ प्राइवेट स्कूल दूसरे प्रकाशकों की किताबें भी चलाते हैं। इसलिए अपने बच्चे के स्कूल की किताबों की सूची और भाषा-नीति स्कूल से लिखित में ले लीजिए।

कक्षा 1 में बच्चे से इंग्लिश में क्या उम्मीद रखें?

NCERT की मृदंग किताब का लक्ष्य है कि फ़ाउंडेशनल स्टेज (कक्षा 2 तक) के अंत तक बच्चे के पास बोलने लायक शब्द हों और वह इंग्लिश में अपनी बात कह सके। लिखना धीरे-धीरे शुरू होता है: चित्र बनाना और नाम लिखना, फिर सरल शब्द, फिर छोटे वाक्यांश और सरल वाक्य। इसलिए कक्षा 1 में लंबी स्पेलिंग रटाने के बजाय बातचीत पर ध्यान दीजिए।

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Lumi Kids शिक्षा टीम

Lumi Kids बनाने वाली टीम। लेख आधिकारिक दस्तावेज़ों (NCERT, CBSE, NEP 2020) और कम उम्र में भाषा सीखने पर प्रकाशित स्रोतों के आधार पर लिखे जाते हैं और ऐप के असली कंटेंट से मिलाकर अपडेट किए जाते हैं। सवाल और सुधार के लिए: hello@lumikids.live